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श्लोक 8.41.44-45h  |
अथ हंस: स तच्छ्रुत्वा प्रापतत् पश्चिमां दिशम्॥ ४४॥
उपर्युपरि वेगेन सागरं मकरालयम्। |
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| अनुवाद |
| कौओं की बात सुनकर हंस मकरलय समुद्र के ऊपर से पश्चिम की ओर बहुत तेजी से उड़ने लगे। |
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| On hearing the words of the crows, the flying swans began flying very fast towards the west over the Makaralaya sea. 44 1/2. |
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