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mahabharat 8.41.44-45h: कौओं की बात सुनकर हंस मकरलय समुद्र के ऊपर से पश्चिम की ओर बहुत तेजी से उड़ने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  8.41.44-45h 
अथ हंस: स तच्छ्रुत्वा प्रापतत् पश्चिमां दिशम्॥ ४४॥
उपर्युपरि वेगेन सागरं मकरालयम्।
 
 
अनुवाद
कौओं की बात सुनकर हंस मकरलय समुद्र के ऊपर से पश्चिम की ओर बहुत तेजी से उड़ने लगे।
 
On hearing the words of the crows, the flying swans began flying very fast towards the west over the Makaralaya sea. 44 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)