श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.41.4 
इमां काकोपमां कर्ण प्रोच्यमानां निबोध मे।
श्रुत्वा यथेष्टं कुर्यास्त्वं निहीन कुलपांसन॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे नीच कर्ण! मैं जो कौए का दृष्टान्त तुमसे कहता हूँ, उसे सुनो और सुनकर जैसा चाहो वैसा करो।॥4॥
 
O lowly Karna! Listen to this parable of the crow that I am telling you and do as you please after listening to it. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)