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श्लोक 8.41.4  |
इमां काकोपमां कर्ण प्रोच्यमानां निबोध मे।
श्रुत्वा यथेष्टं कुर्यास्त्वं निहीन कुलपांसन॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| हे नीच कर्ण! मैं जो कौए का दृष्टान्त तुमसे कहता हूँ, उसे सुनो और सुनकर जैसा चाहो वैसा करो।॥4॥ |
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| O lowly Karna! Listen to this parable of the crow that I am telling you and do as you please after listening to it. ॥ 4॥ |
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