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mahabharat 8.41.39-40h: कौआ अपनी विविध उड़ानों से दर्शकों को चकित करने के उद्देश्य से अपने कारनामे सुना रहा था। उस समय अन्य कौवे उसकी विचित्र उड़ानें बार-बार देखकर बहुत प्रसन्न हुए और जोर-जोर से काँव-काँव करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  8.41.39-40h 
विसिस्मापयिषु: पातैराचक्षाणोऽऽत्मन: क्रिया:।
अथ काकस्य चित्राणि पतितानि मुहुर्मुहु:॥ ३९॥
दृष्ट्वा प्रमुदिता: काका विनेदुरधिकै: स्वरै:।
 
 
अनुवाद
कौआ अपनी विविध उड़ानों से दर्शकों को चकित करने के उद्देश्य से अपने कारनामे सुना रहा था। उस समय अन्य कौवे उसकी विचित्र उड़ानें बार-बार देखकर बहुत प्रसन्न हुए और जोर-जोर से काँव-काँव करने लगे।
 
The crow was narrating his exploits with the intention of astonishing the spectators with his various flights. At that time, the other crows were very happy to see the strange flights of the crow again and again and started cawing loudly. 39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)