Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.41.37-38: इसके बाद, हंस और कौआ दोनों प्रतिस्पर्धा में उड़े। चक्रांग हंस एक ही गति से उड़ रहा था और कौआ सौ उड़ान भर रहा था। चक्रांग इधर से उड़ रहा था और कौआ उधर से। 37-38 | mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रपेततु: स्पर्धया च ततस्तौ हंसवायसौ॥ ३७॥
एकपाती च चक्राङ्ग: काक: पातशतेन च।
पेतिवानथ चक्राङ्ग: पेतिवानथ वायस:॥ ३८॥
अनुवाद
इसके बाद, हंस और कौआ दोनों प्रतिस्पर्धा में उड़े। चक्रांग हंस एक ही गति से उड़ रहा था और कौआ सौ उड़ान भर रहा था। चक्रांग इधर से उड़ रहा था और कौआ उधर से। 37-38
Thereafter both the swan and the crow flew in competition. The Chakraang swan was flying at the same speed and the crow at a hundred flights. The Chakraang flew from this side and the crow from the other side. 37-38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥