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mahabharat 8.41.32-33h: हे राधापुत्र! जब कौए ने ऐसा कहा, तो एक दिव्य प्राणी ने हँसकर उससे कुछ कहा। मेरी बात सुनो। 32 1/2   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.41.32-33h 
एवमुक्ते तु काकेन प्रहस्यैको विहंगम:॥ ३२॥
उवाच काकं राधेय वचनं तन्निबोध मे।
 
 
अनुवाद
हे राधापुत्र! जब कौए ने ऐसा कहा, तो एक दिव्य प्राणी ने हँसकर उससे कुछ कहा। मेरी बात सुनो। 32 1/2
 
O son of Radha! When the crow said this, a celestial being laughed and said something to him. Listen to me about it. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)