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mahabharat 8.41.24: हंस की बात सुनकर मूर्ख कौआ बड़ाई करने लगा और हंस की जाति की तुच्छता के कारण उसे बार-बार धिक्कारता हुआ इस प्रकार उत्तर देने लगा ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.41.24 
अथ हंसवचो मूढ: कुत्सयित्वा पुन: पुन:।
प्रजगादोत्तरं काक: कत्थनो जातिलाघवात्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हंस की बात सुनकर मूर्ख कौआ बड़ाई करने लगा और हंस की जाति की तुच्छता के कारण उसे बार-बार धिक्कारता हुआ इस प्रकार उत्तर देने लगा ॥24॥
 
The foolish crow, on hearing the swan talk, started boasting and replied to him in this manner by repeatedly criticising the swan due to the pettiness of his caste. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)