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mahabharat 8.41.20-21: उस कौवे की बातें सुनकर, जो जोर से काँव-काँव कर रहा था, आकाश में उड़ने वाले पक्षियों में श्रेष्ठ शक्तिशाली चक्रांग ने हँसकर कौवे से इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  8.41.20-21 
तच्छ्रुत्वा प्राहसन् हंसा ये तत्रासन् समागता:॥ २०॥
भाषतो बहु काकस्य बलिन: पततां वरा:।
इदमूचु: स्म चक्राङ्गा वच: काकं विहङ्गमा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस कौवे की बातें सुनकर, जो जोर से काँव-काँव कर रहा था, आकाश में उड़ने वाले पक्षियों में श्रेष्ठ शक्तिशाली चक्रांग ने हँसकर कौवे से इस प्रकार कहा।
 
On hearing the words of that crow which was cawing loudly, the powerful Chakranga, the best of the birds who was flying in the sky, laughed and spoke to the crow as follows. 20-21.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)