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mahabharat 8.41.15-16h: एक दिन मानसरोवर में निवास करने वाले हंस गरुड़ के समान लंबी उड़ान भरते हुए उस समुद्र के तट पर आए। उनके शरीर पर चक्र के चिह्न थे और वे मन में बहुत प्रसन्न थे।   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  8.41.15-16h 
अथ हंसा: समुद्रान्ते कदाचिदतिपातिन:॥ १५॥
गरुडस्य गतौ तुल्याश्चक्राङ्गा हृष्टचेतस:।
 
 
अनुवाद
एक दिन मानसरोवर में निवास करने वाले हंस गरुड़ के समान लंबी उड़ान भरते हुए उस समुद्र के तट पर आए। उनके शरीर पर चक्र के चिह्न थे और वे मन में बहुत प्रसन्न थे।
 
One day, the swans residing in Manasarovar, flying as long as Garuda, came to the shore of that sea. There were signs of Chakra on their bodies and they were very happy in their hearts. 15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)