Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.41.14-15h: एक वैश्य के बच्चों द्वारा जूठा भोजन खिलाकर पाला गया वह कौआ बहुत अभिमानी हो गया और अन्य पक्षियों का अपमान करने लगा, यहाँ तक कि अपने ही जाति के तथा अपने से श्रेष्ठ पक्षियों का भी। | mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चोच्छिष्टभृत: काको वैश्यपुत्रै: कुमारकै:॥ १४॥
सदृशान् पक्षिणो दृप्त: श्रेयसश्चाधिचिक्षिपे।
अनुवाद
एक वैश्य के बच्चों द्वारा जूठा भोजन खिलाकर पाला गया वह कौआ बहुत अभिमानी हो गया और अन्य पक्षियों का अपमान करने लगा, यहाँ तक कि अपने ही जाति के तथा अपने से श्रेष्ठ पक्षियों का भी।
Raised by the children of a Vaishya by feeding them leftovers, that crow became very arrogant and began insulting other birds, even those of its kind and those that were superior to it. 14 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥