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mahabharat 8.41.1: संजय कहते हैं - माननीय राजन! युद्ध में स्वागत करने वाले अधिरथपुत्र कर्ण के उपर्युक्त वचन सुनकर शल्य ने उदाहरण सहित उनसे यह बात कही -॥1॥   |   mahabharat अध्याय 8.41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 41: राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाकर उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए उनकी शरणमें जानेकी सलाह देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.41.1 
संजय उवाच
मारिषाधिरथे: श्रुत्वा वाचो युद्धाभिनन्दिन:।
शल्योऽब्रवीत् पुन: कर्णं निदर्शनमिदं वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - माननीय राजन! युद्ध में स्वागत करने वाले अधिरथपुत्र कर्ण के उपर्युक्त वचन सुनकर शल्य ने उदाहरण सहित उनसे यह बात कही -॥1॥
 
Sanjaya says - Honorable King! After listening to the above words of Karna, son of Adhiratha, who was welcoming the battle, Shalya told him this thing with an example -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)