श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.40.7 
शेते चन्दनचूर्णेशु पूजितो बहुला: समा:।
आहेयो विषवानुग्रो नराश्वद्विपसंघहा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यह भयंकर, विषैला, सर्प के समान दिखने वाला बाण चंदन में रखकर वर्षों से पूजा जाता रहा है। यह मनुष्यों, हाथियों और घोड़ों के समूह को मार डालने में समर्थ है। ॥7॥
 
This fearsome poisonous arrow resembling a serpent has been worshipped for many years after being kept in sandalwood powder. It is capable of killing a crowd of men, elephants and horses. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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