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श्लोक 8.40.56  |
एवमुक्त्वा तु राधेय: पुनरेव विशाम्पते।
अब्रवीन्मद्रराजानं याहि याहीत्यसम्भ्रमम्॥ ५६॥ |
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| अनुवाद |
| प्रजानाथ! ऐसा कहकर राधापुत्र कर्ण ने बिना किसी घबराहट के मद्रराज शल्य से कहा - 'आइये, चलिए'। |
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| Prajanath! Having said this, Radha's son Karna without any nervousness said to Madra king Shalya - 'Come on, come on'. 56. |
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इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कर्णमद्राधिपसंवादे चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें कर्ण और शल्यका संवादविषयक चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४०॥
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