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mahabharat 8.40.55-56h: हे नीच देश में जन्मे शल्य! आज श्रोतागण सुनेंगे और दर्शक देखेंगे कि 'श्रीकृष्ण और अर्जुन ने कर्ण को मारा या स्वयं कर्ण ने उन दोनों को मारा' ॥55 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  8.40.55-56h 
श्रोतारस्त्विदमद्येह द्रष्टारो वा कुदेशज॥ ५५॥
कर्णं वा जघ्नतु: कृष्णौ कर्णो वा निजघान तौ।
 
 
अनुवाद
हे नीच देश में जन्मे शल्य! आज श्रोतागण सुनेंगे और दर्शक देखेंगे कि 'श्रीकृष्ण और अर्जुन ने कर्ण को मारा या स्वयं कर्ण ने उन दोनों को मारा' ॥55 1/2॥
 
Shalya, born in a low country! Today the listeners will hear and the viewers will see whether 'Sri Krishna and Arjun killed Karna or Karna himself killed them both'. ॥ 55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)