vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना
»
श्लोक 54-55h
श्लोक
8.40.54-55h
पुनश्चेदीदृशं वाक्यं मद्रराज वदिष्यसि॥ ५४॥
शिरस्ते पातयिष्यामि गदया वज्रकल्पया।
अनुवाद
मद्रराज! यदि तुम फिर कभी ऐसी बात कहोगे तो मैं अपनी वज्र-सदृश गदा से तुम्हारा सिर टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा।
Madraraj! If you say such a thing again, I will smash your head to pieces with my thunderbolt-like mace. 54 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×