श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  8.40.54-55h 
पुनश्चेदीदृशं वाक्यं मद्रराज वदिष्यसि॥ ५४॥
शिरस्ते पातयिष्यामि गदया वज्रकल्पया।
 
 
अनुवाद
मद्रराज! यदि तुम फिर कभी ऐसी बात कहोगे तो मैं अपनी वज्र-सदृश गदा से तुम्हारा सिर टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा।
 
Madraraj! If you say such a thing again, I will smash your head to pieces with my thunderbolt-like mace. 54 1/2
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd