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श्लोक 8.40.54-55h  |
पुनश्चेदीदृशं वाक्यं मद्रराज वदिष्यसि॥ ५४॥
शिरस्ते पातयिष्यामि गदया वज्रकल्पया। |
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| अनुवाद |
| मद्रराज! यदि तुम फिर कभी ऐसी बात कहोगे तो मैं अपनी वज्र-सदृश गदा से तुम्हारा सिर टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। |
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| Madraraj! If you say such a thing again, I will smash your head to pieces with my thunderbolt-like mace. 54 1/2 |
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