Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.40.53-54h: शल्य! प्रथम तो मैं अपने मित्र दुर्योधन और राजा धृतराष्ट्र, दोनों के कार्यों पर दृष्टि रखता हूँ, दूसरे मुझे निन्दा का भय रहता है और तीसरे मैंने तुम्हें क्षमा करने का वचन दिया है - इन्हीं तीन कारणों से तुम अभी तक जीवित हो। | mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शल्य! प्रथम तो मैं अपने मित्र दुर्योधन और राजा धृतराष्ट्र, दोनों के कार्यों पर दृष्टि रखता हूँ, दूसरे मुझे निन्दा का भय रहता है और तीसरे मैंने तुम्हें क्षमा करने का वचन दिया है - इन्हीं तीन कारणों से तुम अभी तक जीवित हो।
Shalya! Firstly, I keep an eye on the actions of both my friend Duryodhan and King Dhritarashtra, secondly, I fear being criticized and thirdly, I have promised to forgive you - due to these three reasons, you are still alive. 53 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥