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mahabharat 8.40.51-52h: हे मद्रराज! मुझे तीनों लोकों में ऐसा कोई प्राणी नहीं दिखाई देता जो मुझे मेरे इस निश्चय से विचलित कर सके। यह मेरा दृढ़ निश्चय है।   |   mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  8.40.51-52h 
न तद् भूतं प्रपश्यामि त्रिषु लोकेषु मद्रप॥ ५१॥
यो मामस्मादभिप्रायाद् वारयेदिति मे मति:।
 
 
अनुवाद
हे मद्रराज! मुझे तीनों लोकों में ऐसा कोई प्राणी नहीं दिखाई देता जो मुझे मेरे इस निश्चय से विचलित कर सके। यह मेरा दृढ़ निश्चय है।
 
O King of Madra! I do not see any creature in the three worlds who can deviate me from this resolve of mine. This is my firm determination. 51 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)