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mahabharat 8.40.5: शल्य! मैं अपने और पाण्डुपुत्र अर्जुन के बल और पराक्रम को ध्यान में रखते हुए गाण्डीवधारी पार्थ को युद्ध के लिए बुला रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.40.5 
एवमेवात्मनो वीर्यमहं वीर्यं च पाण्डवे।
जानन्नेवाह्वये युद्धे शल्य गाण्डीवधारिणम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
शल्य! मैं अपने और पाण्डुपुत्र अर्जुन के बल और पराक्रम को ध्यान में रखते हुए गाण्डीवधारी पार्थ को युद्ध के लिए बुला रहा हूँ।
 
Shalya! Considering my own and Pandu's son Arjun's strength and prowess, I am calling Gandiva-wielding Partha for the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)