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श्लोक 8.40.43-44h  |
एष मुख्यतमो धर्म: क्षत्रियस्येति न: श्रुतम्॥ ४३॥
यदाजौ निहत: शेते सद्भि: समभिपूजित:। |
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| अनुवाद |
| हमने सुना है कि क्षत्रिय का उत्तम धर्म यही है कि वह युद्ध में मारा जाए और रणभूमि में सो जाए तथा सत्पुरुषों के आदर का पात्र बने ॥43 1/2॥ |
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| We have heard that the best religion for a Kshatriya is to be killed in a war and sleep on the battlefield and become the object of respect of good men. ॥ 43 1/2॥ |
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