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mahabharat 8.40.42-43h: मद्र और सिन्धु-सौवीर देश के लोग पापमय देश में उत्पन्न हुए म्लेच्छ हैं। वे धर्म-कर्म को नहीं जानते। वे इस संसार में धर्म की बातें कैसे समझ सकते हैं?॥42 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  8.40.42-43h 
मद्रका: सिन्धुसौवीरा: धर्मं विद्यु: कथं त्विह॥ ४२॥
पापदेशोद्भवा म्लेच्छा धर्माणामविचक्षणा:।
 
 
अनुवाद
मद्र और सिन्धु-सौवीर देश के लोग पापमय देश में उत्पन्न हुए म्लेच्छ हैं। वे धर्म-कर्म को नहीं जानते। वे इस संसार में धर्म की बातें कैसे समझ सकते हैं?॥42 1/2॥
 
The people of the Madra and Sindhu-Sauvira countries are mlechha born in a sinful country. They do not know Dharma-karma. How can they understand the matters of Dharma in this world?॥ 42 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)