श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 38-40h
 
 
श्लोक  8.40.38-40h 
सुवीरकं याच्यमाना मद्रिका कर्षति स्फिचौ॥ ३८॥
अदातुकामा वचनमिदं वदति दारुणम्।
मा मां सुवीरकं कश्चिद् याचतां दयितं मम॥ ३९॥
पुत्रं दद्यां पतिं दद्यां न तु दद्यां सुवीरकम्।
 
 
अनुवाद
यदि कोई पुरुष मद्र देश की स्त्री से कांजी माँगता है, तो वह उसे कमर से पकड़कर घसीट ले जाती है और कांजी न देने की इच्छा से यह कठोर वचन कहती है - 'मुझसे कोई कांजी न माँगे, क्योंकि वह मुझे बहुत प्रिय है। मैं उसे अपने पुत्र को भी दूँगी, अपने पति को भी दूँगी; परन्तु कांजी नहीं दे सकती।'॥38-39 1/2॥
 
If a man asks for Kanji from a woman of Madra country, she grabs him by the waist and drags him away and, not wanting to give Kanji, she says these harsh words - 'No one should ask Kanji from me, because it is very dear to me. I will give it to my son, I will give it to my husband also; but I cannot give Kanji.'॥ 38-39 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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