श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.40.34 
इति वृश्चिकदष्टस्य विषवेगहतस्य च।
कुर्वन्ति भेषजं प्राज्ञा: सत्यं तच्चापि दृश्यते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त बातें कहने के बाद जो बुद्धिमान विष-चिकित्सक बिच्छू के काटे हुए और उसके विष के बल से पीड़ित मनुष्य की चिकित्सा या औषधि करता है, उसका कथन सत्य प्रतीत होता है ॥ 34॥
 
After saying the above mentioned things, the wise poison-doctor who treats or medicates the person who is bitten by a scorpion and is suffering from the force of its poison, his statement appears to be true. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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