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mahabharat 8.40.24: मद्रदेश में रहनेवाला मनुष्य सदैव दुष्टबुद्धिवाला, सदैव मिथ्याभाषी और सदैव कपटी रहता है। हमने सुना है कि मद्रदेश के लोग मृत्युपर्यन्त दुष्ट रहते हैं॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.40.24 
दुरात्मा मद्रको नित्यं नित्यमानृतिकोऽनृजु:।
यावदन्त्यं हि दौरात्म्यं मद्रकेष्विति न: श्रुतम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मद्रदेश में रहनेवाला मनुष्य सदैव दुष्टबुद्धिवाला, सदैव मिथ्याभाषी और सदैव कपटी रहता है। हमने सुना है कि मद्रदेश के लोग मृत्युपर्यन्त दुष्ट रहते हैं॥ 24॥
 
A person who lives in Madra is always evil-minded, always a liar and always deceitful. We have heard that the people of Madra remain wicked till their death.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)