श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.40.23 
मित्रध्रुङ्मद्रको नित्यं यो नो द्वेष्टि स मद्रक:।
मद्रके संगतं नास्ति क्षुद्रवाक्ये नराधमे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मद्रास देश का नीच व्यक्ति सदैव देशद्रोही होता है। जो हमसे अकारण घृणा करता है, वह मद्रास का नीच व्यक्ति है। मद्रास देश के निवासी जो नीच वचन बोलते हैं, वे किसी के प्रति सौहार्द की भावना नहीं रखते।
 
The mean man of Madras country is always a traitor. The one who hates us without any reason is a lowly person from Madras. The residents of Madras country who speak mean words do not have feelings of cordiality towards anyone.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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