श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.40.2 
कर्ण उवाच
गुणान् गुणवतां शल्य गुणवान् वेत्ति नागुण:।
त्वं तु शल्य गुणैर्हीन: किं ज्ञास्यसि गुणागुणम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा- शल्य! गुणवान पुरुष ही गुणवान पुरुषों के गुणों को जानते हैं, गुणवान पुरुष नहीं। आप तो समस्त गुणों से रहित हैं; फिर आप गुण-दोष किसे मानेंगे?॥2॥
 
Karna said- Shalya! Only the virtuous know the qualities of virtuous men, not the virtuous. You are void of all qualities; Then what will you consider as merits and demerits? 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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