श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.40.18 
सुहृद् भूत्वा रिपु: किं मां कृष्णाभ्यां भीषयिष्यसि।
तौ वा मामद्य हन्तारौ हनिष्ये वापि तावहम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तू मेरा शत्रु होकर मेरा मित्र बनकर मुझे श्रीकृष्ण और अर्जुन से क्यों डरा रहा है? आज या तो वे मुझे मार डालेंगे या मैं उन दोनों को मार डालूँगा॥18॥
 
Being my enemy, why are you pretending to be my friend and threatening me with Shri Krishna and Arjun? Today either they will kill me or I will kill them both.॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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