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mahabharat 8.40.16-17: दुष्ट और पापी देश में उत्पन्न हुए नीच क्षत्रिय और कुलांगर मूर्ख हैं! तुम किसी स्वार्थ के लिए उन दोनों की प्रशंसा करते हो; किन्तु आज समरांगण में उन दोनों को मारकर मैं तुम्हारे बन्धुओं सहित तुम्हारा भी वध कर दूँगा॥16-17॥   |   mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  8.40.16-17 
संस्तौषि तौ तु केनापि हेतुना त्वं कुदेशज॥ १६॥
तौ हत्वा समरे हन्ता त्वामद्य सहबान्धवम्।
पापदेशज दुर्बुद्धे क्षुद्र क्षत्रियपांसन॥ १७॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट और पापी देश में उत्पन्न हुए नीच क्षत्रिय और कुलांगर मूर्ख हैं! तुम किसी स्वार्थ के लिए उन दोनों की प्रशंसा करते हो; किन्तु आज समरांगण में उन दोनों को मारकर मैं तुम्हारे बन्धुओं सहित तुम्हारा भी वध कर दूँगा॥16-17॥
 
The despicable Kshatriyas and Kulangars born in a wicked and sinful country are idiots! You praise both of them for some selfish gain; But today, after killing both of them in Samarangana, I will kill you along with your relatives. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)