श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  8.40.14-15h 
अर्जुने गाण्डिवं कृष्णे चक्रं तार्क्ष्यकपिध्वजौ॥ १४॥
भीरूणां त्रासजननं शल्य हर्षकरं मम।
 
 
अनुवाद
अर्जुन के हाथ में गांडीव धनुष है और श्रीकृष्ण के हाथ में सुदर्शन चक्र है। एक कपिध्वज है और दूसरा गरुड़ध्वज। शल्य! ये सब बातें कायरों को भयभीत करती हैं; परन्तु इससे मेरा आनन्द बढ़ता है। 14 1/2॥
 
Arjuna has Gandiva bow in his hand and Shri Krishna has Sudarshan Chakra in his hand. One is Kapidhwaj and the other is Garudadhwaj. Surgical! All these things frighten cowards; But it increases my joy. 14 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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