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mahabharat 8.40.12-13h: हे शल्य! वे दोनों सिंह-पुरुष रथ पर बैठकर मुझ पर ही आक्रमण करने जा रहे हैं। देखो, मैं कितना धन्य हूँ कि मुझे जन्म मिला॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  8.40.12-13h 
तावेतौ पुरुषव्याघ्रौ समेतौ स्यन्दने स्थितौ॥ १२॥
मामेकमभिसंयातौ सुजातं पश्य शल्य मे।
 
 
अनुवाद
हे शल्य! वे दोनों सिंह-पुरुष रथ पर बैठकर मुझ पर ही आक्रमण करने जा रहे हैं। देखो, मैं कितना धन्य हूँ कि मुझे जन्म मिला॥12 1/2॥
 
O Shalya! Those two lion-men sitting together on a chariot are going to attack me alone. See how blessed I am to have been born.॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)