श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 40: कर्णका शल्यको फटकारते हुए मद्रदेशके निवासियोंकी निन्दा करना एवं उसे मार डालनेकी धमकी देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.40.1 
संजय उवाच
अधिक्षिप्तस्तु राधेय: शल्येनामिततेजसा।
शल्यमाह सुसंक्रुद्धो वाक्शल्यमवधारयन्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! अमित तेजस्वी शल्य के इस प्रकार आपत्ति करने पर राधापुत्र कर्ण अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने शल्य से इस प्रकार कहा कि शब्दरूपी शल्य (बाण) छोड़ने के कारण ही उसका नाम शल्य पड़ा है।॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! Radha's son Karna became very angry when Amit Tejaswi Shalya objected in this manner and decided that it was because of the release of Shalya (arrow) in the form of a word that he got the name Shalya, thus speaking to Shalya. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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