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mahabharat 8.4.7: आश्वासन मिलने पर भी वे स्त्रियाँ बार-बार काँपती रहीं, जैसे केले के वृक्ष चारों ओर से हवा से हिल रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 8.4: धृतराष्ट्रका शोक और समस्त स्त्रियोंकी व्याकुलता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रका शोक और समस्त स्त्रियोंकी व्याकुलता  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.4.7 
समाश्वस्ता: स्त्रियस्तास्तु वेपमाना मुहुर्मुहु:।
कदल्य इव वातेन धूयमाना: समन्तत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
आश्वासन मिलने पर भी वे स्त्रियाँ बार-बार काँपती रहीं, जैसे केले के वृक्ष चारों ओर से हवा से हिल रहे हों।
 
Even after being assured, the women kept trembling repeatedly like banana trees being shaken by the wind from all sides. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)