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mahabharat 8.4.6: हे राजन! तब संजय ने महल की बहुत-सी स्त्रियों को, जो व्याकुल थीं, और जिनकी आँखों से आँसू बह रहे थे, धीरे-धीरे शान्त किया।   |   mahabharat अध्याय 8.4: धृतराष्ट्रका शोक और समस्त स्त्रियोंकी व्याकुलता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रका शोक और समस्त स्त्रियोंकी व्याकुलता  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.4.6 
ततस्ता: संजयो राजन् समाश्वासयदातुरा:।
मुह्यमाना: सुबहुशो मुञ्चन्त्यो वारि नेत्रजम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तब संजय ने महल की बहुत-सी स्त्रियों को, जो व्याकुल थीं, और जिनकी आँखों से आँसू बह रहे थे, धीरे-धीरे शान्त किया।
 
O King! Then Sanjaya gradually pacified the many women of the palace who were agitated and fainting with tears flowing from their eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)