श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रका शोक और समस्त स्त्रियोंकी व्याकुलता  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.4.16 
दु:शासनश्च निहत: पाण्डवेन यशस्विना।
पीतं च रुधिरं कोपाद् भीमसेनेन संयुगे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘इसके अतिरिक्त महाप्रतापी पाण्डवपुत्र भीमसेन ने भी युद्धभूमि में दु:शासन को मारकर क्रोधपूर्वक उसका रक्त पी लिया।’॥16॥
 
‘Also the illustrious Pandava son Bhimasena killed Dushasan on the battlefield and in anger drank his blood.’॥ 16॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि धृतराष्ट्रशोको नाम चतुर्थोेऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें धृतराष्ट्रका शोक नामक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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