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mahabharat 8.4.11: उन्होंने अपनी और सुबलपुत्र शकुनि की बुद्धि को धिक्कारा। फिर बहुत देर तक विचारमग्न रहने के बाद वे बार-बार काँपने लगे। 11.   |   mahabharat अध्याय 8.4: धृतराष्ट्रका शोक और समस्त स्त्रियोंकी व्याकुलता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.4.11 
गर्हयंश्चात्मनो बुद्धिं शकुने: सौबलस्य च।
ध्यात्वा तु सुचिरं कालं वेपमानो मुहुर्मुहु:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपनी और सुबलपुत्र शकुनि की बुद्धि को धिक्कारा। फिर बहुत देर तक विचारमग्न रहने के बाद वे बार-बार काँपने लगे। 11.
 
He cursed his own intelligence and that of Shakuni, son of Subala. Then, after being lost in thought for a long time, he began to tremble repeatedly. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)