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mahabharat 8.39.7: तुझे उचित-अनुचित का ज्ञान नहीं है। मृत्यु ने तुझे अवश्य पका दिया है (अतः तू पके फल के समान गिर ही जाएगा); अन्यथा कौन जीवित रहना चाहता है और इतनी असुरी और अनसुनी बातें कह सकता है?॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 8.39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.39.7 
कार्याकार्यं न जानीषे कालपक्वोऽस्यसंशयम्।
बह्वबद्धमकर्णीयं को हि ब्रूयाज्जिजीविषु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तुझे उचित-अनुचित का ज्ञान नहीं है। मृत्यु ने तुझे अवश्य पका दिया है (अतः तू पके फल के समान गिर ही जाएगा); अन्यथा कौन जीवित रहना चाहता है और इतनी असुरी और अनसुनी बातें कह सकता है?॥ 7॥
 
You have no knowledge of what is right and wrong. Death has undoubtedly ripened you. (Therefore you are bound to fall like a ripe fruit); otherwise who, who wants to stay alive, can say so many absurd and unlistenable things?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)