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mahabharat 8.39.5: और तुम्हारी मोहवश श्रीकृष्ण और अर्जुन को मारने की इच्छा व्यर्थ है; क्योंकि हमने कभी नहीं सुना कि युद्ध में एक गीदड़ ने दो सिंहों को मार डाला हो॥5॥   |   mahabharat अध्याय 8.39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.39.5 
यच्च प्रार्थयसे हन्तुं कृष्णौ मोहाद् वृथैव तत्।
न हि शुश्रुम सम्मर्दे क्रोष्ट्रा सिंहौ निपातितौ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
और तुम्हारी मोहवश श्रीकृष्ण और अर्जुन को मारने की इच्छा व्यर्थ है; क्योंकि हमने कभी नहीं सुना कि युद्ध में एक गीदड़ ने दो सिंहों को मार डाला हो॥5॥
 
And your desire to kill Shri Krishna and Arjun out of attachment is futile; because we have never heard of a jackal killing two lions in a war. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)