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mahabharat 8.39.19: हे सारथिपुत्र! तू महाबली राजकुमार अर्जुन का आह्वान मत कर। जैसे वन में मांस खाकर तृप्त हुआ सियार महाबली सिंह के पास जाकर नष्ट हो जाता है, वैसे ही तू अर्जुन से युद्ध करके विनाश के गर्त में मत गिर।   |   mahabharat अध्याय 8.39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.39.19 
मा सूतपुत्राह्वय राजपुत्रं
महावीर्यं केसरिणं यथैव।
वने शृगाल: पिशितेन तृप्तो
मा पार्थमासाद्य विनङ्क्ष्यसि त्वम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे सारथिपुत्र! तू महाबली राजकुमार अर्जुन का आह्वान मत कर। जैसे वन में मांस खाकर तृप्त हुआ सियार महाबली सिंह के पास जाकर नष्ट हो जाता है, वैसे ही तू अर्जुन से युद्ध करके विनाश के गर्त में मत गिर।
 
Son of a charioteer! Do not invoke the mighty prince Arjuna. Just as a jackal, satiated with eating meat in the forest, gets destroyed when it goes near a mighty lion, similarly, do not fall into the pit of destruction by fighting with Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)