न चेत्तदभिमन्येत पुरुषोऽर्जुनदर्शिवान्।
शतं दद्यां गवां तस्मै नैत्यिकं कांस्यदोहनम्॥ ४॥
अनुवाद
यदि अर्जुन को दिखाने वाला व्यक्ति उस धन को पर्याप्त न समझे तो मैं उसे प्रतिदिन दूध देने वाली सौ गायें तथा पीतल का बना एक दूध का बर्तन दूँगा॥4॥
If the person who shows it to Arjun does not consider that wealth sufficient, then I will give him a hundred cows that give milk every day and a milk pot made of brass.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥