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श्लोक 8.38.26  |
तथा प्रहृष्टे सैन्ये तु प्लवमानं महारथम्।
विकत्थमानं च तदा राधेयमरिकर्षणम्।
मद्रराज: प्रहस्येदं वचनं प्रत्यभाषत॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार हर्ष और गर्व से भरी हुई सेना में जाकर मद्रराज शल्य ने शत्रुओं का संहार करने वाले राधापुत्र महारथी कर्ण से हँसकर यह बात कही। |
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| Thus going into the army filled with joy and boasting, Madra king Shalya smilingly said this to the great warrior Karna, son of Radha, who is the slayer of enemies. 26. |
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इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कर्णावलेपे अष्टात्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें कर्णका अभिमानविषयक अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥
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