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श्लोक  8.38.23 
ता वाच: सूतपुत्रस्य तथा युक्ता निशम्य तु।
दुर्योधनो महाराज संहृष्ट: सानुगोऽभवत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सारथीपुत्र के द्वारा अवसर के अनुकूल कहे गए वचन सुनकर दुर्योधन और उसके सेवक अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
Maharaj! On hearing the words spoken by the son of a charioteer, appropriate to the occasion, Duryodhana and his servants became very pleased. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)