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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.37.6 
मृगपक्षिगणाश्चैव पृतनां बहुशस्तव।
अपसव्यं तदा चक्रुर्वेदयन्तो महाभयम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
बहुत से मृग और पक्षी महान भय की सूचना देते हुए अनेक बार आपकी सेना के दाहिनी ओर चले गये।
 
Many deer and birds, giving information of great fear, went to the right of your army many times. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)