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mahabharat 8.37.44: तत्पश्चात् शल्य को सारथि बनाकर श्वेत घोड़ों से खींचा हुआ वह विशाल रथ, समस्त शत्रुओं का संहार करते हुए अंधकार का नाश करने वाले सूर्यदेव के समान आगे बढ़ा ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.37.44 
स रथ: प्रययौ शत्रून् श्वेताश्व: शल्यसारथि:।
निघ्नन्नमित्रान् समरे तमो घ्नन् सविता यथा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शल्य को सारथि बनाकर श्वेत घोड़ों से खींचा हुआ वह विशाल रथ, समस्त शत्रुओं का संहार करते हुए अंधकार का नाश करने वाले सूर्यदेव के समान आगे बढ़ा ॥ 44॥
 
Thereafter that huge chariot with Shalya as its charioteer and drawn by white horses proceeded forward like the Sun-god who destroys darkness, killing all enemies. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)