Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.37.42: कर्ण ने कहा, "रहने दो, रहने दो। तुम इतना क्यों बक रहे हो? अब मेरा और उनका युद्ध आ पहुँचा है। यदि अर्जुन मुझे यहाँ युद्ध में हरा दे, तो तुम्हारा यह घमंड अच्छा और उचित माना जाएगा।" 42   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  8.37.42 
कर्ण उवाच
भवतु भवतु किं विकत्थसे
ननु मम तस्य हि युद्धमुद्यतम्।
यदि स जयति मामिहाहवे
तत इदमस्तु सुकत्थितं तव॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा, "रहने दो, रहने दो। तुम इतना क्यों बक रहे हो? अब मेरा और उनका युद्ध आ पहुँचा है। यदि अर्जुन मुझे यहाँ युद्ध में हरा दे, तो तुम्हारा यह घमंड अच्छा और उचित माना जाएगा।" 42
 
Karna said, "Let it be, let it be. Why are you blabbering so much? Now the battle between me and them has arrived. If Arjuna defeats me in the battle here, then your boasting will be considered good and right." 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)