श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  8.37.40 
इदमपरमुपस्थितं पुन-
स्तव निधनाय सुयुद्धमद्य वै।
यदि न रिपुभयात् पलायसे
समरगतोऽद्य हतोऽसि सूतज॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे सारथिपुत्र! आज पुनः यह महासंग्राम तुम्हारी मृत्यु के लिए आया है। यदि तुम शत्रु के भय से भाग न जाओ, तो रणभूमि में पहुँचकर अवश्य ही मारे जाओगे॥40॥
 
O son of a charioteer! Today again this great battle has come for your death. If you do not run away out of fear of the enemy, then you will surely be killed on reaching the battlefield. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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