Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.37: कर्ण! क्या तुम्हें वह घटना याद है जब कुरु वन में दुर्योधन की बारात के दौरान गंधर्वों ने उसके शत्रु बनकर उसका अपहरण कर लिया था? उस समय इसी अर्जुन ने सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी अपने उत्तम बाणों से उन शत्रुओं का वध करके धृतराष्ट्रपुत्र को बंदी बनाकर मुक्त कराया था। | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्मरसि ननु यदा परैर्हृत:
स च धृतराष्ट्रसुतोऽपि मोक्षित:।
दिनकरसदृशै: शरोत्तमैर्युधा
कुरुषु बहून् विनिहत्य तानरीन्॥ ३७॥
अनुवाद
कर्ण! क्या तुम्हें वह घटना याद है जब कुरु वन में दुर्योधन की बारात के दौरान गंधर्वों ने उसके शत्रु बनकर उसका अपहरण कर लिया था? उस समय इसी अर्जुन ने सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी अपने उत्तम बाणों से उन शत्रुओं का वध करके धृतराष्ट्रपुत्र को बंदी बनाकर मुक्त कराया था।
Karna! Do you remember the incident when the Gandharvas had kidnapped Duryodhana by pretending to be his enemies during his procession in the Kuru jungle? At that time it was this Arjun who had freed Dhritarashtra's son from captivity by killing many of those enemies with his excellent arrows which were as radiant as the rays of the sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥