Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.33: शल्य ने कहा- कर्ण! अब अतिशयोक्ति बंद करो, रुको। तुमने अपने उत्साह और बल में बहुत कुछ कह दिया है। भला, कहाँ हैं पुरुषोत्तम अर्जुन और कहाँ हैं तुम, जो मनुष्यों में अधम हो?॥33॥ | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शल्य उवाच
विरम विरम कर्ण कत्थना-
दतिरभसोऽप्यतिवाचमुक्तवान्।
क्व च हि नरवरो धनंजय:
क्व पुनरहो पुरुषाधमो भवान्॥ ३३॥
अनुवाद
शल्य ने कहा- कर्ण! अब अतिशयोक्ति बंद करो, रुको। तुमने अपने उत्साह और बल में बहुत कुछ कह दिया है। भला, कहाँ हैं पुरुषोत्तम अर्जुन और कहाँ हैं तुम, जो मनुष्यों में अधम हो?॥33॥
Shalya said- Karna! Now stop exaggerating, stop. You have said too much in your enthusiasm and power. Well, where is Arjun, the best of men and where are you, the worst of humans?॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥