Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.37.31: अधिक कहने से क्या लाभ? यदि यम, वरुण, कुबेर और इन्द्र अपने-अपने अनुचरों सहित इस महायुद्ध में पाण्डुपुत्र अर्जुन की रक्षा के लिए एकत्रित हो जाएँ, तो मैं उन सबको सहित परास्त कर दूँगा।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.37.31 
यमवरुणकुबेरवासवा वा
यदि युगपत्सगणा महाहवे।
जुगुपिषव इहैत्य पाण्डवं
किमु बहुना सह तैर्जयामि तम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अधिक कहने से क्या लाभ? यदि यम, वरुण, कुबेर और इन्द्र अपने-अपने अनुचरों सहित इस महायुद्ध में पाण्डुपुत्र अर्जुन की रक्षा के लिए एकत्रित हो जाएँ, तो मैं उन सबको सहित परास्त कर दूँगा।॥31॥
 
What is the use of saying more? If Yama, Varuna, Kubera and Indra along with their followers come together to protect Arjuna, son of Pandu, in this great war, I shall defeat them along with all of them.'॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)