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mahabharat 8.37.30: यदि सबका नाश करने वाला मृत्यु युद्धस्थल में सदैव सतर्क रहकर पाण्डुपुत्र अर्जुन की रक्षा करता है, तो या तो मैं उसके साथ युद्ध करके उसे मार डालूँगा, अथवा स्वयं भीष्म के सामने यमलोक को चला जाऊँगा॥30॥   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.37.30 
तं चेन्मृत्यु: सर्वहरोऽभिरक्षेत्
सदाप्रमत्त: समरे पाण्डुपुत्रम्।
तं वा हनिष्यामि रणे समेत्य
यास्यामि वा भीष्ममुखो यमाय॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यदि सबका नाश करने वाला मृत्यु युद्धस्थल में सदैव सतर्क रहकर पाण्डुपुत्र अर्जुन की रक्षा करता है, तो या तो मैं उसके साथ युद्ध करके उसे मार डालूँगा, अथवा स्वयं भीष्म के सामने यमलोक को चला जाऊँगा॥30॥
 
If Death, that destroyer of all, remains ever vigilant and protects Arjuna, the son of Pandu, in the battlefield, then I shall either fight with him and kill him, or I shall myself go to Yamaloka in front of Bhishma.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)