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mahabharat 8.37.3-4h: महाराज! जब कर्ण और कौरव योद्धा हर्षपूर्वक चले गए, तो पृथ्वी हिलने लगी और भयंकर अस्पष्ट ध्वनियाँ होने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  8.37.3-4h 
प्रयाते तु तत: कर्णे योधेषु मुदितेषु च॥ ३॥
चचाल पृथिवी राजन् ववाश च सुविस्तरम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! जब कर्ण और कौरव योद्धा हर्षपूर्वक चले गए, तो पृथ्वी हिलने लगी और भयंकर अस्पष्ट ध्वनियाँ होने लगीं।
 
King! As Karna and the Kaurava warriors departed joyously, the earth began to shake and make loud indistinct sounds. 3 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)