Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.25: विद्वान् हो या मूर्ख, अंत समय में यमराज सबके साथ उचित व्यवहार करते हैं। उनसे किसी को मोक्ष नहीं मिलता। अतः हे विद्वान्! मैं कुन्ती के पुत्रों पर अवश्य आक्रमण करूँगा। निश्चय ही, ईश्वर के विधान को कोई नहीं बदल सकता॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राज्ञस्य मूढस्य च जीवितान्ते
नास्ति प्रमोक्षोऽन्तकसत्कृतस्य।
अतो विद्वन्नभियास्यामि पार्थान्
दिष्टं न शक्यं व्यतिवर्तितुं वै॥ २५॥
अनुवाद
विद्वान् हो या मूर्ख, अंत समय में यमराज सबके साथ उचित व्यवहार करते हैं। उनसे किसी को मोक्ष नहीं मिलता। अतः हे विद्वान्! मैं कुन्ती के पुत्रों पर अवश्य आक्रमण करूँगा। निश्चय ही, ईश्वर के विधान को कोई नहीं बदल सकता॥ 25॥
Be it a learned person or a fool, at the end of their life, everyone is treated appropriately by Yamraj. No one gets salvation from him. Therefore, learned one! I will definitely attack Kunti's sons. Certainly, no one can change the law of God.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥