Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.24: शल्य! यह मत सोचो कि मैं उन वीर योद्धाओं के बीच नहीं जाऊँगा; क्योंकि युद्ध से पीछे हटना मित्रों के साथ विश्वासघात होगा और मित्रों के साथ यह विश्वासघात मेरे लिए असहनीय है। इसलिए मैं अपने प्राण त्यागकर द्रोणाचार्य का अनुसरण करूँगा॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न त्वेवाहं न गमिष्यामि मध्ये
तेषां शूराणामिति मां शल्य विद्धि।
मित्रद्रोहो मर्षणीयो न मेऽयं
त्यक्त्वा प्राणाननुयास्यामि द्रोणम्॥ २४॥
अनुवाद
शल्य! यह मत सोचो कि मैं उन वीर योद्धाओं के बीच नहीं जाऊँगा; क्योंकि युद्ध से पीछे हटना मित्रों के साथ विश्वासघात होगा और मित्रों के साथ यह विश्वासघात मेरे लिए असहनीय है। इसलिए मैं अपने प्राण त्यागकर द्रोणाचार्य का अनुसरण करूँगा॥ 24॥
‘Shalya! Do not think that I will not go among those brave warriors; because retreating from the battle will be a betrayal of friends and this betrayal of friends is intolerable for me. That is why I will sacrifice my life and follow Dronacharya.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥